06/11/2014
नमस्कार ....
"भारत लाओ इंडिया हटाओ अभियान"
भारत देश के मेरे प्रिय सभी सम्मानीय नागरिकों से मेरे "भारत लाओ इंडिया हटाओ अभियान" में मेरे सहयोग दे एवं समर्थन करें कृपया अधिक से अधिक संख्या में पोस्ट को लाइक करे एवं शेयर करें जिससे मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा मेरा एक सपना है की पहले पुराने ज़माने में भारत अर्थात हिंदुस्तान को सोने की चिड़ियाँ कहा जाता था मगर आज वर्तमान में ब्रिटिश अंग्रेजी वर्ड इंडिया कहा जाता है जो की बिलकुल गलत है भारत का इंडिया अर्थ कैसे हो गया कौन सी शब्दकोष में भारत को इंडिया लिखा है जिसको मिले सबूत दे मेरा अभियान है आज वर्तमान में क्या अभी से इंडिया भारत कहा जाये में अंग्रेजी शब्द इंडिया को और नही बोल सकता इंडिया बोलने में अच्छा नही लगता भारत बोलने गर्व महसूस होता है आप सभी सम्मानीय नागरिकों से हाथ जोड़कर विन्रम अनुरोध है मेरे इस अभियान में सहयोग एवं साथ देने के आगे आएं और अपनी आवाज बुलंद करें में आपके इस सहयोग के जीवन भर सदैव आभारी रहूँगा आपका अहसान मरते दम नही भूलूंगा और में हमेशा हमेशा भगवान से यही कामना करता हु की आपके जीवन कभी दुःख ना आएं सदैव सुख ही सुख आपके और आपके परिवार को हो. भगवान हमेशा आपको सुखी जीवन प्रदान करें और आपके दुखों को मेरे हिस्से में डाल दे. सभी सम्मानीय नागरिकों को दुखों को दूर करने के लिए परमपिता परमात्मा का हाथ मेरे सर पर है. आप चिंता मत कीजिये केवल सहयोग एवं साथ देवें. आपके पुरे दुःख मुझे देदो। मैं सभीअपने सम्मानीय नागरिकों को दुखों को दूर करने के परमपिता परमात्मा से रोज प्राथना करता हु की सब सुखी हो मेरी यह भावना है हो ना दुःख किसी को ऐसी मेरी प्राथना है मेरी प्राथना प्रभु आपकी भावना बने मेरी प्राथना प्रभु आपकी भावना बने. मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण सूत्र है अगर आपको सफलता पाना है तो आलस्य को छोडो तुम और परिश्रम करने से मर डरो फिर देखिये सफलता आपके कदम चूमेगी। आप लोगों से एक और निवेदन है की अधिक से अधिक अपने देश की मातृभाषा हिंदी का प्रयोग बोलने, पढ़ने और लिखने में कीजिये क्यूंकि अंग्रेजी बोलने, पढ़ने और लिखने में अपनी ६ गुना शक्ति अधिक लगती है मै तो जब पढता था तब अंग्रेजी के एक एक शब्द रट्टू तोता जैसे रट्टा था ऐसी भाषा को क्यों पढ़े जो हमें टेंशन में डाल दे जरा सोचिये विचार कीजिये हम क्या कर रहें हैं. हम सभी देशो की भाषाओँ का तो सम्मान करते हैं पर अपने देश की मातृभाषा हिंदी का अपमान अर्थात सम्मान क्यों नही. क्या हो गया है हमको हमारे देश की मातृभाषा हिंदी होने के बावजूद भी हम हिंदी दिवस मनाते हैं धिक्कार हैं हमें, चुल्लू भर पानी में डूब मारना चाहिए। हमने अपने हाटों से अपने देश की मातृभाषा हिंदी का गला घोंट दिया है हम क्या कर रहे हैं जरा सोचिये. हमें खुद को अंग्रेजी आती नही है पर हम अपने बच्चों अंग्रेजी पढ़ाते हैं सुबह से रात भर केवल अंग्रेजी, अंग्रेजी और बस अंग्रेजी क्या कर रहे हैं जरा सोचिये विचार कीजिये कहाँ अपना देश जा रहा है किस मोड़ पर जा रहा है में तो कहता हु की जिस भाषा को पढ़ने में ६ गुना शक्ति अधिक लगती हो उसे हम क्यों पढ़े लिखे और बोलें और क्या कहूँ ज्यादा नही कहूँगा अंतत में यही कहूँगा आप स्वयं समझदार हैं कृपया शांत मन और दिमाग से एक बार अवश्य सोचे, विचार करें और आगे बढे और मेरे साथ अपनी आवाज बुलंद कीजिये - सभी लोग जोर एक साथ मेरे साथ बोलेंगे
जय हिन्द, जय भारत, भारतमाता की जय, वन्दे मातरम, वन्दे मातरम
मरते दम तक यह बोलना मत छोड़िएगा
जय हिन्द, जय भारत, भारतमाता की जय, वन्दे मातरम, वन्दे मातरम
आपके सहयोग एवं साथ के अपेक्षा में। .....................