22/09/2023
एक गरीब और किसान परिवार में जन्मे मामन खान इंजीनियर, अपनी पढ़ाई बेंगलुरु से की, उसके बाद गुड़गांव में खुद का बिजनेस किया धीरे-धीरे बिजनेस में खूब तरक्की की, लेकिन सपना था कुछ बडा करने का।
मेहनत चलती रही खुद का घर बनाया गुरुग्राम में खुद की मेहनत से, और अपने बिजनेस को खूब बढ़ाया, अपने दम पर, जब उन्हें कोई नहीं जानता था वो तबसे ही लोगों की मदद करते रहते थे एक आम आदमी की तरह।
लेकिन उनका सपना था हरियाणा की राजनीति में आना और अपने लोगों की सेवा करना, इलाके की सेवा करना, धीरे-धीरे वो फि पु झिरका हल्के में घूमने लगे और कांग्रेस पार्टी को जॉइन कर लिया, 2009 के चुनाव के पहले उन्होंने इलाके में घूमकर मन बनाया चुनाव लडने का, अब हमारे यंहा के लोग टिकट को बहुत महत्त्व देते थे, अब कांग्रेस पार्टी का टिकट उन्हें लाना था, कोई भी सीरीयस नहीं था उस समय उनके चुनाव लडने को लेकर क्योंकि खानदानी राजनीति का बोलबाला था, राजनीति को अपनी बपौती समझते थे, और उस समय मौजूदा डिप्टी स्पीकर आजाद का टिकट काटना ऐसे समझो जेसे शैर के मुंह से मांस छीन लिया हो, बिल्कुल इम्पोसिबल बात थी पूरे इलाके और फि पु झिरका विधानसभा के लोगों के लिए खासतौर पर, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पार्टी के लिए काम किया था पहले ही आलाकमान की नजर में थे, उस समय मुझे आज भी याद है सबको यही पक्का लग रहा था की आजाद को टिकट मिलेगा, मामन खान को लेकर तो लोग हंसते थे अरे यार कोन आ गया खामखा अपना टाइम खराब करने, लेकिन हुआ यूं की टिकट का समय आया और मामन खान को कांग्रेस ने टिकट दे दिया, किसी को विश्वास नहीं हुआ सबके सब आश्चर्यचकित रह गए, यंहा तक हम भी और हमारा पूरा गांव भी, इलाका तो था ही था, और फिर पूरे इलाके में मामन खान ही मामन खान का नाम सबकी जबां पर हो गया उसी एक दिन के अंदर।
उसके बाद चुनाव हुआ और मुकाबला था उस समय के इनेलो कैंडिडेट नसीम अहमद से, नसीम अहमद को 42824 वोट मिले और मामन खान को 24630 वोट मिले और नसीम अहमद चुनाव जीत गए।
उसके बाद मामन खान ने हार नहीं मानी कांग्रेस की सरकार बनी, चुनाव के बाद खूब कमाया कराया और सैंकड़ों बच्चों को नौकरियां दिलाई, और पूरे पांच साल सबके सुख दुख में शामिल रहा, और एक-एक के घर पर गया सबकी मदद की हर तरह से और लोगों के दिल में जगह बनाई।
समय आया 2014 विधानसभा चुनाव का टिकट की दौड़ में आजाद और मामन दोनो थे लेकिन पार्टी ने टिकट आजाद को दे दिया, अब चुनौती थी की बिना टिकट चुनाव लडने की लोगों ने कहा आप चुनाव लड़ें हमें टिकट की जरूरत नहीं है, हम आपके साथ है, और फिर लोगों की मोहब्बत को देखते हुए मामन खान ने इंडीपेंडेंट चुनाव लडा।
मजबूती से चुनाव लडा उस समय इनेलो प्रत्याशी नसीम अहमद को 40320 वोट मिले और मामन खान को 37075 वोट मिले और थोडे से मार्जिन से चुनाव हार गए। और कांग्रेस उम्मीदवार को 15943 वोट मिले।
दो दो बार हार के बाद भी मामन खान ने हिम्मत नहीं हारी और फिर मजबूती के साथ फि पु झिरका के विधानसभा के लोगों के साथ दिल से जुडे रहे उनके कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। फिर पूरे पांच साल खूब मेहनत की।
फिर समय आया 2019 के विधानसभा चुनाव का इस बार फिर टिकट की लड़ाई थी लेकिन कांग्रेस पार्टी ने पिछले चुनाव में देख लिया था की मामन खान मामूली अंतर से हारे हैं और मजबूत है पार्टी ने मामन खान को टिकट दिया और फिर चुनाव हुआ।
इस चुनाव में लोगों की मोहब्बत सातवें आसमान पर थी मामन खान के लिए जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता गया लोगों का भारी समर्थन मामन खान को मिलता गया।
जबर्दस्त मजबूती से चुनाव लडा और रिकार्ड मतों से चुनाव जीता, और मामन खान को रिकार्ड तोड 84586 वोट मिले, विपक्षी प्रत्याशी नसीम को 47542 वोट मिले और लगभग 37 हजार वोटों से रिकार्ड तोड जीत हासिल की, और इस जीत के मायने बहुत बड़े थे क्योंकि, इससे खानदानी राजनीति करने वालों को गहरी चोट लगी, और एक ऐसे परिवार का बेटा चुनाव जीता जिसका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था, यंहा तक कोई पंचायत मेंबर भी नहीं था, सफर बहुत मुश्किल था लेकिन कर दिखाया।
भाजपा और जजपा की सरकार बनी, विधायक जी ने कभी सरकार ना होने का बहाना नहीं बनाया और लोगों के काम करता रहा लगभग चार साल हो गए।
और इस बार एक नया अध्याय लिखा जाएगा पूरे हरियाणा में सबसे बड़ी जीत होने का।
कुछ ग़लत लिखा हो तो माफी चाहता हूं।🙏
शुक्रिया
Vakeel Choudhary Sakras 🖋️
#मामनखान
Copy Choudhary Sakras