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धन-धान्य, आरोग्य, समृद्धि एवं खुशियों के पावन पर्व धनतेरस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🏻💐 भगवान धन्वंतरि सभी को सुख,...
29/10/2024

धन-धान्य, आरोग्य, समृद्धि एवं खुशियों के पावन पर्व धनतेरस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🏻💐 भगवान धन्वंतरि सभी को सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें। 🙏🏻🪔

23/10/2024

#प्रतापगढ़ के पट्टी में रामपुर ख़ागल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पूज्य योगऋषि #स्वामी रामदेव जी महाराज पतंजलि योगपीठ हरिद्वार का शुभागमन आज 23अक्टूबर को अपराह्न 1बजे हो रहा है
ज्ञातव्य हो कि प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील के रामपुर खागल गांव में कथा रस प्रवाहक पूज्यपाद जगद्गुरु #स्वामी रामभद्राचार्य की चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा में नित्य प्रति देश भर की नामचीन हस्तियों के आने का क्रम जारी है इसी कड़ी में आज पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी पट्टी आ रहे हैं कल कथा में #बागेश्वरधाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज जी का आगमन होना है उक्त जानकारी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के तुलसी पीठाधीश्वर उत्तराधिकारी #आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने दी है

नौ-दिवसीय उत्सव नवरात्रि का आज आरंभ हो रहा है। लोगों का विश्वास है कि इन नौ दिनों की कठिन उपासना से प्रसन्न होकर देवी उन...
03/10/2024

नौ-दिवसीय उत्सव नवरात्रि का आज आरंभ हो रहा है। लोगों का विश्वास है कि इन नौ दिनों की कठिन उपासना से प्रसन्न होकर देवी उनका कल्याण करने उतरती हैं। सच तो यह है कि किसी आसमान में कोई देवी नहीं रहती। वह हर स्त्री के भीतर ही अवस्थित है उस सृजनात्मक और पालक शक्ति के रूप में जिसे प्रकृति ने सिर्फ और सिर्फ स्त्रियों को सौंपा है। उस अथाह प्यार, ममता और करुणा के रूप में जो कभी मां के रूप में व्यक्त होता है, कभी बहन, कभी बेटी, कभी मित्र, कभी प्रिया और कभी पत्नी के रूप में। दुर्गा पूजा, गौरी पूजा और काली पूजा स्त्री-शक्ति के तीन विभिन्न आयामों के सम्मान के प्रतीकात्मक आयोजन हैं। काली स्त्री का आदिम, अनगढ़ और अनियंत्रित स्वरुप है जिस पर काबू करना पुरुष अहंकार के बस की बात नहीं। गौरी या पार्वती स्त्री का सामाजिक तौर पर नियंत्रित, गृहस्थ, ममतालु रूप है जो सृष्टि का जनन और पालन करती है। दुर्गा स्त्री के आदिम और गृहस्थ रूपों के बीच की स्थिति है जो परिस्थितियों के अनुरुप सौम्य भी है, करूणामयी भी और संहारक भी।
नवरात्रि की सार्थकता तब है जब स्त्रियां अपने ही भीतर मौजूद काली, गौरी और दुर्गा को पहचानने, जगाए और आवश्यकता के अनुरूप उनका उपयोग करना सीखे। पुरुषों पर देवी तब ही प्रसन्न होगी जब वे स्त्रियों को अपने से कमतर और उपभोग की वस्तु समझने की मानसिकता छोड़कर उनका सम्मान करना सीख लेंगे।
आप सभी मित्रों को स्त्री शक्ति के सम्मान के महापर्व नवरात्रि की बधाई और शुभकामनाएं !


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भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। शिक्षकों के अमूल्य योगदान को सलाम करते हुए 'शिक्षक दिवस...
05/09/2024

भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। शिक्षकों के अमूल्य योगदान को सलाम करते हुए 'शिक्षक दिवस' की शुभकामनाएं!

26/08/2024

वसुदेव सुतं देवं कंस चाणूर मर्दनम्।
देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।आज का दिन सभी भारतवासियों के लिए राष्ट्र के प्रति निष्ठा, कर्त...
15/08/2024

समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज का दिन सभी भारतवासियों के लिए राष्ट्र के प्रति निष्ठा, कर्त्तव्य व शहीदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिन है। उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूँ, जिन्होंने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करवाने के लिए योगदान दिया।
आइए, आज हम सभी भारत को विश्व में सबसे आगे ले जाने का संकल्प लें और आजादी के नायकों के सपनों के भारत का निर्माण करें।

बड़े आदमी कमाने के लिए पसीना नही बहाते। वे निर्णय लेते है। लोगो को काम पर लगा देते है। दबाव देते है इम्पॉसिबल करने को, ज...
16/07/2024

बड़े आदमी कमाने के लिए पसीना नही बहाते। वे निर्णय लेते है। लोगो को काम पर लगा देते है। दबाव देते है इम्पॉसिबल करने को, जुगाड़ बनाने को- बस।
ऐसी चीज, जो उन्हें खुद करनी नही आती, कोई साधारण आदमी करके देता है।
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और साधारण आदमी उठता है, काम पर जाता है। आठ दस घण्टे खपता है। उसे स्किल्स चाहिए। बुद्धि लगानी है।
कुछ क्रिएट करना है। शाबासी चाहिए, प्रमोशन चाहिए। नया सीखना है, नया करता है।
औऱ हर सीख, हर नई उपलब्धि से उसे इंच भर ग्रोथ मिलती है। वह एक घर, एक गाड़ी, एक मकान खरीदता है।
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ऐसे दसियो, सैंकड़ो, हजारो लोग मालिक को कमाकर दे रहे है। लाखो की मेहनत का कट- पैसा, पैसा, पैसा - इतना पैसा...
की पैसा खुद इर्रिलेवेंट हो जाये।
याने इंसानी टाइप ख्वाहिशें, सौ दो सौ करोड़ में पूरी हो जाती है। बड़ी कार, बंगला, बच्चो की शिक्षा, देश विदेश भ्रमण, थोड़ा फेम...सुरक्षित बैलेंस।
इसके बाद वह एक फिगर है।
कैसे स्पेंड करोगे??
●●
ऐसा पैसा, जिसके लिए दूसरे मेहनत करते है, उसे बर्बाद करने से दर्द नही होता। दौलत मुफ्त की, अनगिनत हो जाये, तो अक्सर लोग इसके चार्म से ऊपर उठ जाते हैं।
पर किस तरह उठेंगे, उनकी इंसानी गुणवत्ता पर निर्भर है। रॉकफेलर, टाटा,अजीज प्रेमजी फाउंडेशन बनाते है। धन लोगो मे बांटते है।
अपनी पसन्द का कॉज - शिक्षा, मानवाधिकार, स्वास्थ्य... व्हाट एवर दे थिंक एसेंसियल। कुछ एल्फ्रेड नोबल जैसे भी..
जब ढेर दौलत हो गई, तो उसने ऐसे पुरस्कार का बंदोबस्त किया, कि सौ साल से हर साइंटिस्ट, इकोनॉमिस्ट, डॉक्टर का सपना गले मे नोबल का पट्टा डाल लेना है।
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लेकिन मूर्ख, कृपण और सनकी लोग दौलत सहेजते है। निजी सुख में उड़ाते है। चार हजार करोड़ का घर, डेढ़ सौ कारें, हीरे जड़ी घड़ी, दो चार हेलीकॉप्टर, ब्रांडेड कपड़े, जूते।
जाने क्या ही एक्स्ट्रा निजी सुख मिलेगा। 20 लाख की कार की गद्दी, बदन को नरमाई देती है, 120-130 की स्पीड में सड़क पर चलती है। एसी 22 डिग्री पर रहता है।
5 करोड़ की कार में गद्दी क्या एक्स्ट्रा नरमाई देगी? AC क्या -122 डिग्री कूलिंग देगा?? 600 की रफ्तार पर चलाओगे क्या??
नही। मगर उसी सुविधा की बहुत ज्यादा कीमत देने से पता लगेगा, कि आपके पास, धन ज्यादा हो गया है।
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अगर लोगो को पैसा दिखाया न जाये, तो मजा कैसा?? शादी ब्याह भारत में दिखावे का सुअवसर है।
10 करोड़ की शादी, सौ करोड़ की शादी.. अब दो चार हजार करोड़ की शादी देख रहे है।पर लेवल वही है।
यूपी में ब्याह में सस्ता लौंडा नाच होता है। आपकी बारात में रियाना और जस्टिन बीबर को नाच रहे है। इस लौंडा नाच में, देश दुनिया के तमाम "हू इज हू" ठुमके दे रहे हैं।
बहू के घाघरे में भगवान बिठा दो, यह भी पैसे का प्रदर्शन है। कोई और करता, तो दंगे हो जाते। हुजूर करें, तो कोई सुनगुन नही। क्योकि उनने सरकार भी खरीद रखी है, चैनल भी, ट्रोल भी।
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फोर्ड ने अपने कर्मचारियों को आठ सिलेंडर इंजन बनाने का चैलेंज दिया। उस सोच ने अफोर्डेबल, शक्तिशाली कार दी, इंसानी जीवनशैली को बदल दिया। धनी हुए।
बिल गेट्स ने सस्ता कम्प्यूटर दिया, हर घर डेस्कटॉप ने दुनिया को प्रोफाउंडली बदल दिया, जीवन आसान किया। धनी हुए।
बड़ा आदमी अपने लोगो को मानवीय सीमाओं कों तोड़ने का चैलेंज देता है। फोर्ड, गेट्स बौद्धिक सीमाओं को तोड़ने का चैलेंज देते हैं।
अम्बानी- अडानी भी देते है
नैतिकताओं को तोड़ने का चैलेंज।
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इन्होंने अपनी दौलत कोई नया प्रोडक्ट, कोई नई सेवा देकर नही बनाई। यह अनैतिक दौलत है। अनैतिक तरीको से कमाई,और अनैतिक मीन्स में व्यय होती हुई हम देख रहे हैं।
यह ब्याह, भारत के कैपिटलिज्म, और पश्चिम के कैपिटलिज्म का बेसिक फर्क बताता है। ऐसा कैप्टिलिज्म और इसे बनाने वाले लोग चूल्हे भाड़ में जायें।
वर वधू को मेरी शुभकामनाएं हैं।

जिनके कपट, दंभ नहिं माया, तिनके हृदय बसहु रघुराया।इस बात पर बहस होती ही रही है कि राम ईश्वर के अवतार थे, मिथक थे अथवा इत...
17/04/2024

जिनके कपट, दंभ नहिं माया, तिनके हृदय बसहु रघुराया।

इस बात पर बहस होती ही रही है कि राम ईश्वर के अवतार थे, मिथक थे अथवा इतिहास, लेकिन हमारी हजारों साल लंबी हिन्दू सांस्कृतिक परंपरा के वे शिखर पुरुष अवश्य माने जाते रहे हैं। रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मीकि ने उन्हें भगवान नहीं, मर्यादा पुरुषोत्तम ही कहा था। वे एक प्रखर योद्धा भी थे, आदर्श शासक भी और शालीन व्यक्तित्व भी। ऐसे पहले व्यक्ति जिनपर अपने समय के उच्चतम जीवन मूल्यों के आचरण के लिए देवत्व आरोपित किया गया। जिन पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को उन्होंने जिया, उनकी मिसालें आज भी दी जाती हैं। उनकी शासन-व्यवस्था रामराज्य को आज भी शासन का आदर्श माना जाता है। आधुनिक समय में छलपूर्वक बालि की हत्या, सीता की अग्निपरीक्षा और परित्याग, शंबूक वध जैसे उनके कुछ कृत्यों के लिए राम को कठघरे में खड़ा किया जाता है। ऐसा शायद इसीलिए क्योंकि राम का मूल्यांकन हम आधुनिक, लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर कसकर करते हैं। राम की जो सीमाएं दिखती हैं,वे सीमाएं स्वयं राम की नहीं, त्रेतायुगीन जीवन मूल्यों, परंपराओं और स्थापित शासकीय आदर्शों की थीं। अपनी तमाम करुणा, प्रेम और मानवीयता के बावज़ूद राम उन परंपराओं और राजकीय मर्यादाओं के पार नहीं जा सके। समय बदला तो द्वापर युग मे कृष्ण ने अपने समय के धार्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों का बार-बार अतिक्रमण भी किया और समाज द्वारा अपनी स्थापनाओं को मान्यता भी दिलाई। किसी ऐतिहासिक या पौराणिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन उसके समय के सापेक्ष ही किया जाना चाहिए।
देशवासियों को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मदिन रामनवमी की बधाई !

देवाधिदेव महादेव की आराधना को समर्पित पावन पर्व महाशिवरात्रि की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं!भगवान भोलेन...
08/03/2024

देवाधिदेव महादेव की आराधना को समर्पित पावन पर्व महाशिवरात्रि की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं!
भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की कृपा से सभी के मनोरथ पूर्ण हों, सृष्टि का कल्याण हो।
हर-हर महादेव!

24/02/2024

स्टूल मंत्री को बताओ कोई ,कि पेपर लीक हुआ है ,और रद्द भी हो गया

जो भरा नहीं है भावों से,बहती जिसमें रसधार नहीं,वह हृदय नहीं वह पत्थर है,जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं.आइए हम अपने देश की स...
26/01/2024

जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह हृदय नहीं वह पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं.

आइए हम अपने देश की स्वर्णिम विरासत को याद करें और भारत का हिस्सा होने पर गर्व महसूस करें।
75वें गणतंत्र दिवस की सभी भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाई...

नए साल में लिखेंगे हम मिलकर नई कहानी /हर नए साल में लोगों को लगता  है कि यह साल देश-दुनिया के लिए कुछ नया, कुछ अलग लेकर ...
01/01/2024

नए साल में लिखेंगे हम मिलकर नई कहानी /
हर नए साल में लोगों को लगता है कि यह साल देश-दुनिया के लिए कुछ नया, कुछ अलग लेकर आने वाला है। हर साल यह भरम टूट भी जाता है। देश-दुनिया की वर्तमान परिस्थितियां बताती हैं कि आने वाले साल में भी सब कुछ वही रहने वाला है। देश में होगा वही बंटा हुआ समाज, वही रहनुमा, वही विभाजनकारी सोच, वही सामाजिक और आर्थिक विषमताएं, वही असहिष्णुता, वही सियासी ड्रामें और वही भांड मीडिया। देश के बाहर युद्ध, आतंक और विनाश का वही-वही वैश्विक परिदृश्य। ऊपर जानलेवा वायरस के कुछ और नए अवतार। हां, नए साल के स्वागत के बेमतलब हंगामे में देश में असंख्य मुर्गे और बकरे ज़रूर कट जाने वाले हैं। अमीर क्लबों और होटलों में नंगी-अधनंगी लड़कियां नचाई जाएंगी। बेमतलब की आतिशबाजी में हवा में थोड़ा और जहर घुलेगा। चौतरफा शराब की नदियां बहेंगी। जहां दारूबन्दी हैं वहां नकली और जहरीली शराब पीकर कुछ और लोग मरेंगे।
नए साल में कुछ नया तब होगा जब हमारे भीतर कुछ नया घटित होगा। कुछ ऐसा कि हमारे आसपास की दुनिया थोड़ी और मुलायम, थोड़ी और खूबसूरत, थोड़ी और प्रेमिल, थोड़ी और निरापद दिखे। सड़कों पर मानसिक दरिद्रता के भोंडे प्रदर्शन के बज़ाय आने वाले साल के लिए कुछ सार्थक सोचें और करें। खाए-अघाए लोगों के साथ मस्ती करने की जगह कुछ खुशियां उनके साथ बांटे जिन्हें उनकी वाक़ई ज़रुरत है। थोड़ी मुस्कान उन होंठों पर धरें जो मुस्कुराना भूल गए हैं। जो अपने अरसे से रूठे बैठे हैं, उन्हें मना लें। क्षमा मांग लें उनसे जीवन के किसी मोड़ पर जिनका दिल दुखाया है हमने। बासी पड़ चुके रिश्तों में फिर से ताजगी भरें। राजनीति को ख़ुद पर ऐसा हावी न होने दें कि वह हमारी वैचारिक स्वतंत्रता छीनकर हमें मानसिक तौर पर पंगु बना दे। धर्मों की निजता को सड़कों पर इस तरह मत उतारें कि वह हमारी उदार सामाजिक संरचना को ही तोड़ डाले। नए साल में एक दूसरे की आस्थाओं और निजता का सम्मान करना सीखें। राजनीति, धर्म और तमाम विचारधाराएं हमारे लिए बनी हैं, हम उनके लिए नहीं। इनमें से कुछ भी एक इंसानी जान से ज्यादा कीमती नहीं है। यह बात समझने और महसूस करने के लिए किसी वैचारिक, सियासी या धार्मिक चश्मे की नहीं, थोड़ी -सी अंतर्दृष्टि और बहुत सारी संवेदनशीलता की दरकार है !
आप सभी मित्रों को नववर्ष की मंगलकामनाएं !
from Dhruv Gupt timline
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🙏Regards~ S.K.Yadav & Family🙏

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