06/04/2020
ैं_नहीं_मेरा_रतन
नींद नहीं आ रही...इस फ़ोटो ने अभिभूत कर दिया...
दीये जलाते हुए खुद की फ़ोटो अपलोड करने के लिए फ़ोन उठाया था,लेकिन अब मन बदल गया...अब मेरी जगह मेरे रतन की,भारत के रतन की फ़ोटो लगा रहा हूँ !
सुनो, बुद्धिजीवियो ! ये टाटा मेमोरियल होस्पिटल,बम्बई (केन्सर रोगियों के लिए आशा की सबसे बड़ी किरण) के माध्यम से विज्ञान भी जानता है और टाटा कम्पनी के मालिक के नाते व्यापार भी...!
जितने वैज्ञानिकों-डोक्टरों के बारे में आप और मैंने किताबों में नहीं पढ़ा,उतने इसके यहाँ नौकरी करते हैं...और जितने देशों के आप और मैं नाम नहीं जानते,उतने देशों में इसका व्यापार है...!
कोरोना से लड़ने के लिए देश को 1500 करोड़ दिए हैं....देश के लिए सुई और नमक से लेकर ट्रक और टेक्नोलोजी तक सब बनाता है...!
लेकिन एक भी बार ना 1500 करोड़ का हिसाब माँगा और ना दीये जलाने का वैज्ञानिक कारण पूछा...बस इतना बोला-देश बचाने के लिए पैसे और चाहिए तो बता देना और 82 साल की उम्र में भी दीपक लेकर घर के दरवाज़े पर खड़ा हो गया...क्योंकि ये राष्ट्रीय शिष्टाचार जानता है...इस मिट्टी से मोहब्बत करता है...इसे पता है राष्ट्रीय हौसला क्या होता है और संकट में राष्ट्र के साथ खड़े होने की क़ीमत क्या होती है...!
वाह रे भारत के रतन...तेरी जननी को प्रणाम-
“माता तीन रतन जण,क दानी-क भक्त-क शूर !
नहीं तो तूँ बाँझ रहिजे,काहे गँवावत नूर !!”
अब समझ आया-
बड़ी बातें करने और बड़े उदाहरण पेश करने में कितना फ़र्क़ है !
बड़ा दिखने और बड़ा होने में कितना फ़र्क़ है !
बड़ा बनकर फिरने और बड़ा बनकर जीने में कितना फ़र्क़ है !
“बड़ा बड़ाई ना करे,बड़ा ना बोले बोल !
रहिमन हीरा कब कहे,लाख टका मेरो मोल !!”
अभिभूत हूँ भारत के कोहिनूर...राष्ट्र के रतन...आज भावघट भर गया और शब्द घट रीत गया...शब्दकोश में आज तेरे लिए कोई संज्ञा-सर्वनाम-उपमा-प्रत्यय-विशेषण नहीं है...बस ये दो पंक्तियाँ स्वीकार करना-
“भारत रतन सिर्फ़ एक तूँ,बाक़ी सब रतनावलियाँ !
भारत गौरव सिर्फ़ एक तूँ,बाक़ी सब गिरदावलियाँ !!”